Ayatollah Khamenei की मौत: Iran का सर्वोच्च नेता जो दशकों तक America और Israel से लड़ता रहा

 

Ayatollah Khamenei


Ayatollah Ali Hosseini Khamenei Iran के सर्वोच्च नेता, जिन्होंने लगभग चार दशकों तक इस देश पर लौह मुट्ठी से शासन किया  अमेरिकी और इजरायली संयुक्त हमलों में मारे गए हैं। Iranian state media ने रविवार सुबह उनकी मौत की पुष्टि की। Khamenei की मृत्यु न केवल Iran बल्कि पूरे Middle East को एक अनिश्चित भविष्य की ओर धकेल देती है।

राज्य प्रसारणकर्ता IRIB ने रिपोर्ट किया  "The Supreme Leader of Iran Has Reached Martyrdom." Fars News Agency के अनुसार Khamenei शनिवार तड़के हमले के वक्त Tehran स्थित अपने कार्यालय में अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे थे।

Khamenei कौन थे?  क्रांति के रक्षक की पूरी कहानी

Khamenei का जन्म 1939 में Iran के पवित्रतम शहर Mashhad में हुआ था। वे कम उम्र में ही Shiite Muslim cleric बन गए। 1979 की Islamic Revolution से पहले वे ईरान के शाह Mohammad Reza Pahlavi के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय थे और इसके लिए जेल भी गए।

1981 में उन पर एक हत्या की कोशिश हुई जिसमें उनका दायां हाथ हमेशा के लिए बेकार हो गया। इसके बावजूद वे राजनीति में सक्रिय रहे और पश्चिम विरोधी मंच पर राष्ट्रपति चुने गए। Khomeini की मृत्यु के बाद 1989 में Khamenei कुछ ही हफ्तों में उनके उत्तराधिकारी बन गए। धार्मिक कद में Khomeini से कमतर होने के बावजूद वे राजनीतिक रूप से अत्यंत चतुर साबित हुए और धीरे-धीरे Iran की सेना, खुफिया सेवाओं, न्यायपालिका और राज्य मीडिया पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लिया।

Iran Nuclear Programme  वह दांव जो उल्टा पड़ गया

Khamenei की सबसे बड़ी विरासत और सबसे बड़ी गलतीदोनों Iran nuclear programme ही रहा। उन्होंने बार-बार दावा किया कि यह कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और यहां तक कि एक धार्मिक फरमान (fatwa) भी जारी किया कि परमाणु हथियार इस्लाम में वर्जित हैं। लेकिन वे nuclear energy के विकास को राष्ट्रीय संप्रभुता का मामला मानते थे और इससे कभी पीछे नहीं हटे।

2013 में Hassan Rouhani के राष्ट्रपति बनने के बाद Khamenei की मंजूरी से 2015 में JCPOA (Joint Comprehensive Plan of Action) पर हस्ताक्षर हुए। इस परमाणु समझौते का मकसद Iran की अर्थव्यवस्था को वर्षों के कुचलने वाले sanctions से मुक्त करना था। लेकिन Khamenei इस समझौते पर पूरी तरह भरोसा नहीं करते थे  और उनकी यह आशंका सही निकली जब Trump ने 2018 में एकतरफा इससे हाथ खींच लिया।

इसके बाद Khamenei ने uranium enrichment में तेजी लाई और "resistance economy" की नीति पर और ज्यादा जोर दियायानी आत्मनिर्भरता और टकराव, समझौता नहीं। 2019 में Trump की "maximum pressure" नीति ने Iran की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह तोड़ दिया।

Axis of Resistance Proxy Groups से Middle East में दबदबा

Khamenei के नेतृत्व में Iran ने IRGC (Islamic Revolutionary Guard Corps) और प्रॉक्सी समूहों के जरिए Middle East में अपना प्रभाव फैलाया। Lebanon में Hezbollah, Gaza में Hamas, Yemen में Houthis और Iraq Syria में कई Shiite सशस्त्र समूह  यही था Khamenei का "Axis of Resistance" यानी प्रतिरोध का धुरी।

2003 में Saddam Hussein के पतन के बाद Iran का Iraq में प्रभाव बढ़ा। Syria के गृहयुद्ध में IRGC अग्रिम मोर्चे पर था। 2019 में US ने IRGC को आतंकी संगठन घोषित कियाकिसी देश की सेना के साथ यह अभूतपूर्व कदम था। ISIS के खिलाफ लड़ाई ने Iran को Arab देशों में और गहरे धंसने का मौका दिया, हालांकि इससे Sunni-Shiite सांप्रदायिक तनाव भी बढ़ा।

October 7 Attacks और Khamenei की विरासत का पतन

7 अक्टूबर 2023 को Hamas के Israel पर हमले ने Khamenei की सावधानी से बनाई गई छवि को चकनाचूर कर दिया। Iran हमेशा इन हमलों में अपनी भूमिका से इनकार करता रहा, लेकिन इस घटना ने एक ऐसी घटनाओं की श्रृंखला शुरू की जिसने Iran की क्षेत्रीय ताकत को एक-एक करके तोड़ दिया।

Israel ने October 7 के बाद Iran की प्रॉक्सी ताकत को व्यवस्थित रूप से कमजोर किया। एक 12-दिवसीय युद्ध के बाद Tehran के पास न बातचीत की ताकत बची, न परमाणु ठिकाने सुरक्षित रहे, न प्रॉक्सी समूह बचे और न अर्थव्यवस्था। Khamenei की दशकों की मेहनत से बनाई strategic depth धूल में मिल गई।

सुधारों का विरोध : Mahsa Amini से Masoud Pezeshkian तक

Khamenei के शासनकाल में Iran में बार-बार सुधार की मांग उठी और बार-बार क्रूर दमन हुआ। उन्होंने राष्ट्रपति Mohammad Khatami के सुधारवादी आंदोलन को दबाया। 2009 में चुनावी धांधली के आरोपों पर भड़के प्रदर्शनों को कुचलने में उन्होंने Ahmadinejad का पूरा समर्थन किया।

2021 में Ebrahim Raisi का राष्ट्रपति बनना Khamenei की विचारधारा की जीत थी। लेकिन Mahsa Aminiएक 22 वर्षीय महिला जिसकी मृत्यु Iran की नैतिकता पुलिस की हिरासत में हुई। महिलाओं और युवाओं की अगुआई में हुए इस आंदोलन को Khamenei ने राज्य की पूरी ताकत से कुचला सैकड़ों मारे गए, हजारों गिरफ्तार हुए।

2024 में सुधारवादी Masoud Pezeshkian के राष्ट्रपति चुने जाने से उम्मीद जगी थी कि Iran अंतरराष्ट्रीय समुदाय से फिर जुड़ेगा और nuclear deal होगी। लेकिन Israel के हमलों ने इस उम्मीद को चूर-चूर कर दिया।


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Tehran पर हमला  : Khamenei के घर और दफ्तर तबाह

28 फरवरी को किए गए नए हमले खास तौर पर Khamenei और अन्य शीर्ष नेताओं को निशाना बनाकर किए गए। Airbus के सैटेलाइट चित्रों में Tehran स्थित नेता के आवास से काला धुआं उठता दिखा और परिसर की कई इमारतें गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त नजर आईं।

US President Donald Trump ने कहा कि अमेरिका एक "massive and ongoing operation" चला रहा है ताकि इस "wicked, radical dictatorship" को America की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बनने से रोका जाए। उन्होंने Iranian जनता से अपील की कि वे अपनी सरकार खुद संभालें।

Khamenei की विरासत  'Martyrdom' या ऐतिहासिक पतन?

Khamenei के समर्थकों का कहना है कि उन्होंने US और Israel को चुनौती देने वाली विदेश नीति के लिए अपनी जान दी, यही उनकी shahaadat (martyrdom) है। उनके आलोचक कहते हैं कि उनका nuclear programme, proxy war strategy और सुधारों का दमन ही वे कारण थे जिनकी वजह से Iran इस कगार पर पहुंचा।

जब Khamenei ने 1989 में सत्ता संभाली, तब Iran पर तीन दशकों से ज्यादा समय तक किसी बड़े दुश्मन ने सीधा हमला नहीं किया था। उन्होंने Iran को एक formidable regional power बनाया। लेकिन उनके शासन के अंतिम वर्षों में देश भ्रष्टाचार, आर्थिक तबाही और बढ़ती युवा बेरोजगारी से जूझ रहा था।

निष्कर्ष : Khamenei के बाद Iran का भविष्य क्या होगा?

Khamenei की मृत्यु Iran और Middle East दोनों के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है। Islamic Republic का भविष्य अब पूरी तरह अनिश्चित है। Iran nuclear programme का क्या होगा? IRGC और Axis of Resistance का क्या बनेगा? Masoud Pezeshkian के नेतृत्व में क्या Iran पश्चिम से नए सिरे से बात करेगा, या कट्टरपंथी ताकतें एक बार फिर सत्ता पर काबिज होंगी?

दशकों तक Khamenei ने पश्चिम से जुड़ाव को बेकार बताया और कहा कि दुश्मन एक दिन हमला करेंगे ही। उनके कट्टरपंथी समर्थकों के लिए उनकी मौत ने उन्हें सही साबित कर दिया भले ही उनके हाथों बनाई हर नींव मलबे में तब्दील हो गई हो।


यह लेख अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। 

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